Sunday, May 12, 2019

कैसे बने भैरव बाबा काशी के कोतवाल, जानिए पूरी कहानी




कैसे बने भैरव बाबा काशी के कोतवाल, जानिए पूरी कहानी

1/6काल भैरव ने काट दिया ब्रह्माजी का पांचवां मुख



काल भैरव के काशी में स्‍थापित होने के पीछे एक बहुत ही रोचक पौराण‍िक कथा है। एक बार ब्रह्माजी और विष्णुजी के बीच यह चर्चा छिड़ गई कि दोनों में बड़ा कौन है? चर्चा के बीच शिवजी का जिक्र आने पर ब्रह्माजी के पांचवें मुख ने शिव की आलोचना कर दी, जिससे शिव बहुत क्रुद्ध हुए। उसी क्षण भगवान शिव के क्रोध से काल भैरव का जन्म हुआ। इसी कारण काल भैरव को शिव का अंश कहा जाता है। काल भैरव ने शिवजी की आलोचना करनेवाले ब्रह्माजी के पांचवें मुख को अपने नाखुनों से काट दिया।

2/6भैरव को लगा ब्रह्म हत्‍या का दोष



अब यह मुख उनके हाथ से अलग नहीं हो रहा था। तभी शिवजी प्रकट हुए। उन्‍होंने भैरव से कहा कि अब तुम्‍हें ब्रह्म हत्‍या का दोष लग चुका है और इसकी सजा यह है कि तुम्‍हें एक सामान्‍य व्‍यक्ति की तरह तीनों लोकों का भ्रमण करना होगा। जिस स्‍थान पर यह शीश तुम्‍हारे हाथ से छूट जाएगा, वहीं पर तुम इस पाप से मुक्‍त हो जाओगे।

3/6ब्रह्म हत्‍या नामक कन्‍या भैरव के पीछे पड़ गई



शिवजी की आज्ञा से काल भैरव तीनों लोकों की यात्रा पर चल दिए। उनके जाते ही शिवजी की प्रेरणा से एक कन्या प्रकट हुई। एक तेजस्‍वी कन्‍या, जो अपनी लंबी जीभ से कटोरे में रक्‍तपान कर रही थी। यह कन्‍या कोई और नहीं ब्रह्म हत्‍या थी। इसे शिवजी ने भैरव के पीछे छोड़ दिया था।

4/6भैरव निकल पड़े तीनों लोक मुक्ति पाने के लिए




शिवजी के कहे अनुसार, भैरव ब्रह्म हत्‍या के दोष से मुक्ति पाने के लिए तीनों लोक की यात्रा कर रहे थे और वह कन्‍या भी उनका पीछा कर रही थी। फिर एक दिन जैसे ही भैरव बाबा ने काशी में प्रवेश किया कन्‍या पीछे छूट गई। शिवजी के आदेशानुसार काशी में इस कन्‍या का प्रवेश करना मना था।

5/6यहां छूटा भैरव के हाथ से ब्रह्म शीश




काशी शिव की नगरी है, जहां वह बाबा विश्वनाथ के रूप में नगर के राजा के तौर पर पूजे जाते हैं। यहां गंगा के तट पर पहुंचते ही भैरव बाबा के हाथ से ब्रह्माजी का शीश अलग हो गया और भैरव बाबा को ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्ति मिली। काल भैरव के पाप मुक्त होते ही वहां शिवजी प्रकट हुए और उन्होंने काल भैरव को वहीं रहकर तप करने का आदेश दिया।

6/6काल भैरव के बिना अधूरे हैं बाबा विश्‍वनाथ के दर्शन



शिवजी ने काल भैरव को आशीर्वाद दिया कि तुम इस नगर के कोतवाल कहलाओगे और इसी रूप में तुम्हारी युगों-युगों तक पूजा होगी। शिव प्रेरणा से जिस स्थान पर काल भैरव रह गए, बाद में वहां काल भैरव का मंदिर स्‍थापित कर दिया गया। काशी में मान्‍यता है कि भक्‍तों को बाबा विश्वनाथ के बाद काल भैरव के दर्शन करना अनिवार्य है। अन्‍यथा बाबा विश्वनाथ के दर्शन भी अधूरे मानेे जाते है। Contect-






कथनी और करनी में अंतर

* पण्डित की कहानी *
कहानी और करनी में अंतर 
✍️Edited by - पं आदर्श पांडेय शिवम्
                        -@sp
            श्री लक्ष्मीप्रपनाजीवार स्वामी जी महाराज
एक पंण्डित एक नदी किनारे रहता था। वह
इतना ज्ञानी था कि दूर और पास के कई पण्डित
उससे सलाह लेने आते थे। वे पण्डित पर आदर और सम्मान
की वर्षा करते थे। दुसरे किनारे पर एक
लक्ष्मी नाम की दूध
वाली रहती थी। उसका दिन
व्यस्त रहता था। वह सुबह जल्दी उठकर दूध
निकालती, अपने वृद्ध पिता के लिए भोजन
पकाती और उसके बाद दूध बाँटने बाहर निकल
पड़ती।
उसे एक नाव पर नदी पार
करनी पड़ती थी। एक दिन
पण्डित उसका इंतजार कर रहा था। आखिर वह आई तब वह
बोला-आह, लक्ष्मी तुम अन्त में आ
ही गई। मैं तुमाहरा प्रातः काल से इन्तजार कर
रहा था। मुझे कल से दूध सूर्योदय से पहले चाहिए।
अगली सुबह लक्ष्मी भोर शुरू होते
ही किनारे दौडी लेकिन नाव वाला देर
सुबह तक नहीं आया। लक्ष्मी ने नाव
वाले से जल्दी करने को का आग्रह किया क्योंकि उसे
जानकारी थी कि पण्डित दूध के लिए
इंतजार कर रहा होगा। पहुँचने पर पंडित ने शिकायत
की कि तुम दुबारा देर से अई ,क्या हुआ।
लक्ष्मी माफी माँगते हुए
बोली कि पण्डित जी, नाव वाला देर से
आया।
उस दिन पण्डित का मिजाज खराब था। वह चिल्लाया- बहाना मत
सुनाओ। तुमने मेरी इच्छा का आनादर करने
की हिम्मत कैसे की? तुम्हें
नहीं मालूम कि मैं कितना महान हूँ?
लक्ष्मी ने रोना शुरू किया लेकिन पंडित
शेखी बघारता रहा। क्या तुम
जानती हो मैं कितना विद्वान् हूँ? तुम केवल दूध
वाली हो, मैं सारी चीजें
जानता हूँ। वह नदी जीवन
नदी है। लोग हरि का नाम लेकर पार कर लेतें हैं।
लक्ष्मी ने पण्डित के शब्दों को बहुत
गंभीरता से लिया और अगले दिन समय पर आने
का वादा कर वहाँ से चली गयी। उसने
सोचा कि मैं पण्डित जी के कहे के अनुसार
हरि का नाम लेकर नदी पार कर
सकती हूँ। यह बात पण्डित जी ने
पहले क्यों नहीं कही।
अगले दिन लक्ष्मी, पण्डित के घर सूर्योदय से
पहले पहुँच गयी। पण्डित उसे देखकर
आश्चर्यचकित था क्योंकि उसने नाव वाले
को तो देखा ही नहीं। पण्डित
जी ने पूछा, आज तुमने नदी कैसे पार
की। लक्ष्मी मुस्कराई और
बोली ,आपही ने तो मुझे
रास्ता बताया था कि हरी का नाम लो और
नदी पार कर लो, तो मैंने वैसा ही किया।
" यह असम्भव है", पण्डित चिल्लाया और उसे से
नदी पार करने के लिए कहा। लक्ष्मी ने
दुबारा बगैर किसी मुश्किल के हरि का नाम गाते हुए
नदी पार कर ली। ऐसा करते वह
बिलकुल सुखी थी। पण्डित ने
हरि का नाम लेकर यही करने
की कोशिश की लेकिन उसने जैसे
ही अपने कपडे भीगने से बचाने
की कोशिश की वह नदी में
गिर पड़ा।
लक्ष्मी चकित थी। वह
बोली," वह पंडित जी, आप
हरि का बिलकुल चिन्तन नहीं कर रहे थे। आप
तो अपनी धोती के बारे में सोचने में व्यस्त
थे इसलिए काम नहीं बना। पण्डित,
लक्ष्मी की सच्ची भक्ति सेआश्चर्यचकित
हो गया और उसने माना कि उसका विश्वास, उसके अपने
खाली ज्ञान से ज्यादा शक्तिशाली था।
उसने सच्चाई से लक्ष्मी को आशीर्वाद
दिया।
अध्यात्मिक भाव
शिव बाबा उन लोगों को पण्डित कहते हैं जो ज्ञान को केवल
दोहराता रहते हैं लेकिन जीवन में
नहीं उतारते। हमें पण्डित की तरह
नहीं होना चाहिए। दूसरों को जो कहते हैं पहले
खुद वैसा बनना चाहिए। कथनी और
करनी में फर्क नहीं होना चाहिए।

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गो माता से जुड़ी कुछ रोचक जानकारी

             गो माता से जुड़ी कुछ रोचक जानकारी । 
✍️Edited by- पंडित आदर्श पांडेय शिवम्
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🙏जय श्री कृष्ण 🙏

1. गौ माता जिस जगह खड़ी रहकर आनंदपूर्वक चैन की सांस लेती है । वहां वास्तु दोष समाप्त हो जाते हैं ।
     
2. जिस जगह गौ माता खुशी से रभांने लगे उस जगह देवी देवता पुष्प वर्षा करते हैं ।

3. गौ माता के गले में घंटी जरूर बांधे ; गाय के गले में बंधी घंटी बजने से गौ आरती होती है ।

4. जो व्यक्ति गौ माता की सेवा पूजा करता है उस पर आने वाली सभी प्रकार की विपदाओं को गौ माता हर लेती है ।

5. गौ माता के खुर्र में नागदेवता का वास होता है । जहां गौ माता विचरण करती है उस जगह सांप बिच्छू नहीं आते ।

6. गौ माता के गोबर में लक्ष्मी जी का वास होता है ।

7. गौ माता कि एक आंख में सुर्य व दूसरी आंख में चन्द्र देव का वास होता है ।

8. गौ माता के दुध मे सुवर्ण तत्व पाया जाता है जो रोगों की क्षमता को कम करता है।

9. गौ माता की पूंछ में हनुमानजी का वास होता है । किसी व्यक्ति को बुरी नजर हो जाये तो गौ माता की पूंछ से झाड़ा लगाने से नजर उतर जाती है ।

10. गौ माता की पीठ पर एक उभरा हुआ कुबड़ होता है , उस कुबड़ में सूर्य केतु नाड़ी होती है । रोजाना सुबह आधा घंटा गौ माता की कुबड़ में हाथ फेरने से रोगों का नाश होता है ।

11. एक गौ माता को चारा खिलाने से तैंतीस कोटी देवी देवताओं को भोग लग जाता है ।

12. गौ माता के दूध घी मख्खन दही गोबर गोमुत्र से बने पंचगव्य हजारों रोगों की दवा है । इसके सेवन से असाध्य रोग मिट जाते हैं ।

13. जिस व्यक्ति के भाग्य की रेखा सोई हुई हो तो वो व्यक्ति अपनी हथेली में गुड़ को रखकर गौ माता को जीभ से चटाये गौ माता की जीभ हथेली पर रखे गुड़ को चाटने से व्यक्ति की सोई हुई भाग्य रेखा खुल जाती है ।

14. गौ माता के चारो चरणों के बीच से निकल कर परिक्रमा करने से इंसान भय मुक्त हो जाता है ।

15. गौ माता के गर्भ से ही महान विद्वान धर्म रक्षक गौ कर्ण जी महाराज पैदा हुए थे।

16. गौ माता की सेवा के लिए ही इस धरा पर देवी देवताओं ने अवतार लिये हैं ।

17. जब गौ माता बछड़े को जन्म देती तब पहला दूध बांझ स्त्री को पिलाने से उनका बांझपन मिट जाता है ।

18. स्वस्थ गौ माता का गौ मूत्र को रोजाना दो तोला सात पट कपड़े में छानकर सेवन करने से सारे रोग मिट जाते हैं ।

19. गौ माता वात्सल्य भरी निगाहों से जिसे भी देखती है उनके ऊपर गौकृपा हो जाती है ।

20. काली गाय की पूजा करने से नौ ग्रह शांत रहते हैं । जो ध्यानपूर्वक धर्म के साथ गौ पूजन करता है उनको शत्रु दोषों से छुटकारा मिलता है ।

21. गाय एक चलता फिरता मंदिर है । हमारे सनातन धर्म में तैंतीस कोटि देवी देवता है ,हम रोजाना तैंतीस कोटि देवी देवताओं के मंदिर जा कर उनके दर्शन नहीं कर सकते पर गौ माता के दर्शन से सभी देवी देवताओं के दर्शन हो जाते हैं ।

22. कोई भी शुभ कार्य अटका हुआ हो बार बार प्रयत्न करने पर भी सफल नहीं हो रहा हो तो गौ माता के कान में कहिये रूका हुआ काम बन जायेगा !

 23. गौ माता सर्व सुखों की दातार है ।

हे मां आप अनंत ! आपके गुण अनंत ! इतना मुझमें सामर्थ्य नहीं कि मैं आपके गुणों का बखान कर सकूं ।

1.श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी हे नाथ नारायण वासुदेव ।।

2.रघुपति राघव राजा राम पतित पावन सीता राम।।
जय गाय माता की
जय श्री कृष्णा

।।जय जय श्री राम।।

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जाने मां कली का अवतार कैसे हुआ।।

जाने मां कली का अवतार कैसे हुआ।

शास्‍त्रों के अनुसार मां भगवती ने दुष्‍टों का अंत करने के लिए विकराल रूप धारण किया था जिन्‍हें मां काली के नाम से जाना जाता है. इनकी आराधना से मनुष्य के सभी भय दूर हो जाते हैं.

जानें, मां काली के उत्‍पन्‍न होने की कथा...
मां काली

                         
                          मां कली सोहार वाली

मां दुर्गा का विकराल रूप हैं मां काली और यह बात सब जातने हैं कि दुष्‍टों का संहार करने के लिए मां ने यह रूप धरा था. शास्‍त्रों में मां के इस रूप को धारण करने के पीछे कई कथाएं प्रचलित हैं और उनका व्‍याखान भी वहां मिलता है.
आइए जानें मां के इस भयंकर रूप के पीछे की कथा:
एक बार दारुक नाम के असुर ने ब्रह्मा को प्रसन्न किया. उनके द्वारा दिए गए वरदान से वह देवों और ब्राह्मणों को प्रलय की अग्नि के समान दुःख देने लगा. उसने सभी धर्मिक अनुष्ठान बंद करा दिए और स्वर्गलोक में अपना राज्य स्थापित कर लिया. सभी देवता, ब्रह्मा और विष्णु के धाम पहुंचे. ब्रह्मा जी ने बताया की यह दुष्ट केवल स्त्री दवारा मारा जायेगा. तब ब्रह्मा, विष्णु सहित सभी देव स्त्री रूप धर दुष्ट दारुक से लड़ने गए. परतु वह दैत्य अत्यंत बलशाली था, उसने उन सभी को परास्त कर भगा दिया.
ब्रह्मा, विष्णु समेत सभी देव भगवान शिव के धाम कैलाश पर्वत पहुंचे तथा उन्हें दैत्य दारुक के विषय में बताया. भगवान शिव ने उनकी बात सुन मां पार्वती की ओर देखा और कहा हे कल्याणी जगत के हित के लिए और दुष्ट दारुक के वध के लिए में तुमसे प्रार्थना करता हुं. यह सुन मां पार्वती मुस्कराई और अपने एक अंश को भगवान शिव में प्रवेश कराया. जिसे मां भगवती के माया से इन्द्र आदि देवता और ब्रह्मा नहीं देख पाए उन्होंने देवी को शिव के पास बैठे देखा.
मां भगवती का वह अंश भगवान शिव के शरीर में प्रवेश कर उनके कंठ में स्थित विष से अपना आकार धारण करने लगा. विष के प्रभाव से वह काले वर्ण में परिवर्तित हुआ. भगवान शिव ने उस अंश को अपने भीतर महसूस कर अपना तीसरा नेत्र खोला. उनके नेत्र द्वारा भयंकर-विकराल रूपी काले वर्ण वाली मां काली उत्तपन हुई. मां काली के लालट में तीसरा नेत्र और चन्द्र रेखा थी. कंठ में कराल विष का चिन्ह था और हाथ में त्रिशूल व नाना प्रकार के आभूषण व वस्त्रों से वह सुशोभित थी. मां काली के भयंकर व विशाल रूप को देख देवता व सिद्ध लोग भागने लगे.
मां काली के केवल हुंकार मात्र से दारुक समेत, सभी असुर सेना जल कर भस्म हो गई. मां के क्रोध की ज्वाला से सम्पूर्ण लोक जलने लगा. उनके क्रोध से संसार को जलते देख भगवान शिव ने एक बालक का रूप धारण किया. शिव श्मशान में पहुंचे और वहां लेट कर रोने लगे. जब मां काली ने शिवरूपी उस बालक को देखा तो वह उनके उस रूप से मोहित हो गई. वातसल्य भाव से उन्होंने शिव को अपने हृदय से लगा लिया तथा अपने स्तनों से उन्हें दूध पिलाने लगी. भगवान शिव ने दूध के साथ ही उनके क्रोध का भी पान कर लिया. उनके उस क्रोध से आठ मूर्ति हुई जो क्षेत्रपाल कहलाई.
शिवजी द्वारा मां काली का क्रोध पी जाने के कारण वह मूर्छित हो गई. देवी को होश में लाने के लिए शिवजी ने शिव तांडव किया. होश में आने पर मां काली ने जब शिव को नृत्य करते देखा तो वे भी नाचने लगी जिस कारण उन्हें योगिनी भी कहा गया

 जय मा काली सोनहर वाली द्वारा संपादित किया गया है।
                                                      🙏  धन्याबा🙏
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बिल्वपत्र का महत्व✍️

🙏 ॐ नमः शिवाय🙏




बिल्वपत्र  का महत्व✍️

बेलपत्र को संस्कृत में 'बिल्वपत्र' कहा जाता है.

यह भगवान शिव को बहुत ही प्रिय है. ऐसी मान्यता है कि बेलपत्र और जल से भगवान शंकर का मस्तिष्क शीतल रहता है. पूजा में इनका प्रयोग करने से वे बहुत जल्द प्रसन्न होते हैं.

हमारे धर्मशास्त्रों में ऐसे निर्देश दिए गए हैं, जिससे धर्म का पालन करते हुए पूरी तरह प्रकृति की रक्षा भी हो सके. यही वजह है कि देवी-देवताओं को अर्पित किए जाने वाले फूल और पत्र को तोड़ने से जुड़े कुछ नियम बनाए गए हैं.

बेलपत्र तोड़ने के नियम:

1. चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी और अमावस्या तिथ‍ियों को, सं‍क्रांति के समय और सोमवार को बेलपत्र न तोड़ें.

2. बेलपत्र भगवान शंकर को बहुत प्रिय है, इसलिए इन तिथ‍ियों या वार से पहले तोड़ा गया पत्र चढ़ाना चाहिए.

3. शास्त्रों में कहा गया है कि अगर नया बेलपत्र न मिल सके, तो किसी दूसरे के चढ़ाए हुए बेलपत्र को भी धोकर कई बार इस्तेमाल किया जा सकता है.

अर्पितान्यपि बिल्वानि प्रक्षाल्यापि पुन: पुन:।

शंकरायार्पणीयानि न नवानि यदि क्वचित्।। (स्कंदपुराण)

4. टहनी से चुन-चुनकर सिर्फ बेलपत्र ही तोड़ना चाहिए, कभी भी पूरी टहनी नहीं तोड़ना चाहिए. पत्र इतनी सावधानी से तोड़ना चाहिए कि वृक्ष को कोई नुकसान न पहुंचे.

5. बेलपत्र तोड़ने से पहले और बाद में वृक्ष को मन ही मन प्रणाम कर लेना चाहिए.

 श‍िवलिंग पर कैसे चढ़ाएं बेलपत्र:

1. महादेव को बेलपत्र हमेशा उल्टा अर्पित करना चाहिए, यानी पत्ते का चिकना भाग शिवलिंग के ऊपर रहना चाहिए.

2. बेलपत्र में चक्र और वज्र नहीं होना चाहिए.

3. बेलपत्र 3 से लेकर 11 दलों तक के होते हैं. ये जितने अधिक पत्र के हों, उतने ही उत्तम माने जाते हैं.

4. अगर बेलपत्र उपलब्ध न हो, तो बेल के वृक्ष के दर्शन ही कर लेना चाहिए. उससे भी पाप-ताप नष्ट हो जाते हैं.

5. श‍िवलिंग पर दूसरे के चढ़ाए बेलपत्र की उपेक्षा या अनादर नहीं करना चाहिए.

 शिव स्तुति मंत्र
पशूनां पतिं पापनाशं परेशं गजेन्द्रस्य कृत्तिं वसानं वरेण्यम।
जटाजूटमध्ये स्फुरद्गाङ्गवारिं महादेवमेकं स्मरामि स्मरारिम।1।

महेशं सुरेशं सुरारातिनाशं विभुं विश्वनाथं विभूत्यङ्गभूषम्।
विरूपाक्षमिन्द्वर्कवह्नित्रिनेत्रं सदानन्दमीडे प्रभुं पञ्चवक्त्रम्।


Omkareshwar jyotirlinga
                      Baidnath jyotirlinga
Kashi Vishwanath jyotirlinga

Mother's day special status and poem

Here are some of the wishes and poems in Hindi which will be great to share with your mom this Mother’s Day.
।।मां प्यारी मां।।
मेरी प्यारी माँ तू कितनी प्यारी है


जग है अंधियारा तू उजियारी है

शहद से मीठी हैं तेरी बातें

आशीष तेरा जैसे हो बरसातें

डांट तेरी है मिर्ची से तीखी

तुझ बिन ज़िंदगी है कुछ फीकी

तेरी आंखो में छलकते प्यार के आंसू

अब मैं तुझसे मिलने को भी तरसूं

माँ होती है भोरी भारी

सबसे सुन्दर प्यारी प्यारी

-----------------
 मां के आंचल का छव

मेरे सर्वस्व की पहचान

अपने आँचल की दे छाँव

ममता की वो लोरी गाती

मेरे सपनों को सहलाती

गाती रहती, मुस्कराती जो

वो है मेरी माँ।

प्यार समेटे सीने में जो

सागर सारा अश्कों में जो

हर आहट पर मुड़ आती जो

वो है मेरी माँ।

दुख मेरे को समेट जाती

सुख की खुशबू बिखेर जाती

ममता की रस बरसाती जो        
 वो 
है मेरी माँ।
-----------------
माँ आँखों से ओझल होती,

आँखें ढूँढ़ा करती रोती।
वो आँखों में स्‍वप्‍न सँजोती,

हर दम नींद में जगती सोती।

वो मेरी आँखों की ज्‍योति‍,

मैं उसकी आँखों का मोती।

कि‍तने आँचल रोज भि‍गोती,

वो फि‍र भी ना धीरज खोती।

कहता घर मैं हूँ इकलौती,

दादी की मैं पहली पोती।

माँ की गोदी स्‍वर्ग मनौती,

क्‍या होता जो माँ ना होती।

नहीं जरा भी हुई कटौती,

गंगा बन कर भरी कठौती।

बड़ी हुई मैं हँसती रोती,

आँख दि‍खाती जो हद खोती।

शब्‍द नहीं माँ कैसी होती,

माँ तो बस माँ जैसी होती।

आज हूँ जो, वो कभी न होती,

मेरे संग जो माँ ना होती।।
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Mother's day  special status 

एक ऐसा डॉक्टर जिसे डिग्री की ज़रुरत नहीं होती वो है ” माँ “

मेरी परवरिश में मेरी माँ का हाथ सबसे ज्यादा है तभी आजतक मेरे अंदर अभी भी बचपन ज़िंदा है 

मरने के बहुत रास्ते है पर जन्म लेने के लिए सिर्फ माँ…. 




  • माँ तो वो फरिश्ता है जिसकी कोख से जन्म लेने के लिए भगवान् भी तरसते हैं 
  • माँ तेरा क़र्ज़ मुझसे अदा क्या होगा….तू अगर नाराज है तो, खुश मुझसे “ईश्वर ” क्या होगा…
  • Me : माँ मुझे नींद नहीं आ रही
    माँ : तो जा कर बर्तन धो ले 😈😈
    Me : माँ नींद में बोल रही हूँ मैं …😀😀

  • सास : ये तुम्हारी माँ का घर नहीं है 😏 😏
    मैं : हाँ तो ये आपकी माँ का भी नहीं है 😛😛 .
  • जब तक मेरी माँ जिंदा थी मैं बच्चा था….
  • मैंने ” माँ ” के कंधे पर सर रख कर पूछा , “माँ ” कब तक मुझे अपने कन्धों पर सोने दोगी! माँ का जवाब था बेटा जब तक तू, मुझे अपने कंधे पर ना उठा ले तब तक
  • मा से ऐसा रिश्ता बनाया जाए, जिसको निगाहों में बिठाया जाए, रहे उसका और मेरा रिश्ता कुछ ऐसा कि वो अगर उदास हो तो मुझसे भी मुस्कराया न जाए …
  • जन्नत का दूसरा नाम माँ हैं।

  • प्यार करना कोई तुमसे सीखे, प्यार कराना कोई तुमसे सीखे, तुम ममता की मूरत नहीं सब के दिल का टुकड़ा हो माँ …

  • कौन कहता है कि भगवान् एक है ? मेरी माँ भी तो है..
  • माँ है मोहब्बत का नाम , माँ को हज़ारों सलाम , कर दे फ़िदा अपनी ज़िन्दगी …आए जो बच्चों का नाम. 
  • सारी रौनक देख ली दुनिया की मगर जो सकून तेरे पहलू में है माँ वो और कहीं नहीं है… 
  • मंज़िल दूर बहुत है, छोटी सी ज़िन्दगी में फ़िक़रें बहुत है, मार डालती दुनिया हमें कब की लेकिन माँ की दुआओं में असर बहुत है… 
  • जो कुछ भी मिला है मुझे तेरी दुआओं का असर है ,
    मैं जो कुछ हूँ आज तेरी बस तेरी दुआओं का असर है ,
    जो आज मैं खुश हूँ तो मेरा नहीं कमाल ,
    मेरी जो खुशियाँ हैं वो सब तेरी दुआओं का असर है। 
  • माँ की एक दुआ ज़िन्दगी बना देती है ,
    खुद रोएगी पर तुम्हें हसा देगी ,
    कभी भूल कर भी माँ को ना रुलाना ,
    एक छोटी सी बूँद पूरी धरती हिला देगी। 
  • लबों पे उसके कभी बदुआ नहीं होती ,बस एक माँ है जो मुझसे खफा नहीं होती।
  • सीधा साधा भोला भाला मै ही सबसे अच्छा हूँ ,कितना भी हो जाऊ बड़ा माँ मै आज भी तेरा बच्चा हूँ ।
  • माँ‬ तो माँ है, ‪इनका‬ ‪दर्जा‬ ‪सर्वोच्च‬ ‪हैं‬।
  • कभी न उस घर में सूनापन हो, वो जिन घरो में ‎माँ‬ के चरण है।
  • ये जो सख्त रस्तो पे भी आसान सफ़र लगता हे…ये मुझ को माँ की दुआओ का असर लगता है,
  • एक मुद्दत हुई मेरी मां नही सोई …मेने एक बार कहा था के मुझे डर लगता है।
  • मैं सब कुछ ‪भूल‬ सकता हूँ…तुम्हे नहीं माँ ,‪मुस्कुराने‬ की वजह ‪सिर्फ‬ तुम हो।
  • माँ से बढ़ कर कोई गुरु नहीं होता।
  • माँ बिना जिंदगी वीरान होती है तनहा सफर में हर राह सुनसान होती है ज़िंदगी में माँ का होना ज़रूरी है माँ की दुआओं से ही हर मुश्किल आसान होती है।
  • जिस घर में ‎माँ‬ की कदर नहीं होती,उस घर में कभी बरकत नहीं होती।
  • माँ की अवज्ञा करना सबसे बड़ा अपराध हैं।
  • .अज़ीज़ भी वो है नसीब भी वो है दुनिया की भीड़ में करीब भी वो है उनकी दुआओं से चलती है जिंदगी मेरी क्यूंकि खुद भी वो है और तक़दीर भी वो है।
  • ऊपर जिसका अंत नहीं उसे आसमां कहते हैं , जहाँ में जिसका अंत नहीं उसे माँ कहते हैं।
  • बूढी हुइ मा तो हाथ पकडने को शरमाते हो, भूल गये बचपन मे गोद मे बेठके रोटी खाइ है…
मन की बात जान ले जो आँखों से पढ़ ले जो दर्द हो चाहे ख़ुशी आंसू की पहचान कर ले जो वो हस्ती जो बेपन्हा प्यार करे माँ ही तो है वो जो बच्चो के लिए जिए



  • जन्नत‬ का हर ‪लम्हा‬ दीदार‬ किया था, ‎माँ‬ तूने ‪गोद‬ मे उठा कर जब ‪प्यार‬ किया था(•‿•)


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Maundeshwari

मां मुंडेश्वरी धाम परिसर में आयोजित दो दिवसीय मुंडेश्वरी महोत्सव का भव्य आगाज रविवार की शाम होगा।...  मां मुंडेश्वरी धाम परिसर में आयोजित...